चौबेपुर क्षेत्र के भंदहा कला गांव में स्थित विशाल जलाशय के पास मिले स्तंभ और प्रतिमाएं 1600 साल पुरानी
पुरातत्व विभाग ने अपनी आख्या में इसकी पुष्टि की है, गांव वाले खुश
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
वाराणसी।
वैसे तो बनारस को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, यह नगर हजारों साल पुराना है लेकिन इसकी तस्दीक भी अब जमीन के गर्भ से हो रही है।
जिले के चौबेपुर क्षेत्र के भंदहा कला गांव में स्थित विशाल जलाशय के पास मिले स्तंभ और प्रतिमाएं 1600 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। पुरातत्व विभाग ने अपनी आख्या में इसकी पुष्टि की है। क्षेत्र में मिले अवशेषों में एक दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग भी शामिल है, जो सातवीं शताब्दी का बताया जा रहा है। इन अवशेषों से इस बात का प्रमाण मिलता है कि यहां प्राचीन काल में एक भव्य मंदिर हुआ करता था।
ग्रामवासियों ने कई बार पुरातत्व विभाग से इन अवशेषों की जांच कराने का अनुरोध किया था। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव की टीम ने क्षेत्र का अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, यहां मिली देव प्रतिमाएं 9वीं-10वीं शताब्दी की हैं।

जलाशय, जिसे अमृत सरोवर योजना के तहत सुन्दरीकरण के लिए चुना गया था, 6 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला है।
भंदहा कला गांव के निवासी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता पवन पाण्डेय इन प्राचीन देव प्रतिमाओं के संरक्षण, जलाशय के सुन्दरीकरण और दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग के लिए भव्य मंदिर निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
पुरातत्व विभाग की आख्या के बाद अब सरकार भी इस पर ध्यान देगी, जिससे क्षेत्रीय लोगों में उत्साह का माहौल है। यह खोज क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में प्राचीन काल से ही लोग रहते थे और यहां एक समृद्ध संस्कृति थी। लेकिन अब फिर से ये तथ्य इस बात का प्रमाण है कि ये इलाका प्राचीन नगर है।

