निखिलेश मिश्र, पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी
चिलचिलाती गर्मियों में राजस्थान के चूरू में जब तापमान रिकॉर्ड स्तर पर होता है, तब माउंट आबू में ठंड का एहसास होता है। यहां एक तरफ झीलों की नगरी उदयपुर है, तो दूसरी तरफ उससे कुछ सौ किलोमीटर दूरी पर रेगिस्तान है। एक तरफ दक्षिण राजस्थान के घने जंगल हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर में नदियां बहती हैं। अरावली की पहाड़ियां इस प्रदेश को और ख़ूबसूरत बनाती हैं।
राजस्थान का शाब्दिक अर्थ है राजाओं का स्थान यानी शूरवीरों की धरती। राजस्थान अपनी बोली, खान-पान, किलों, हवेलियों, संस्कृति, और मेहमाननवाज़ी के लिए जाना जाता है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है। राजस्थान का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है, देश के कुल क्षेत्रफल का 10.4 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में है। साल 2011 जनगणना के मुताब़िक राजस्थान की जनसंख्या 6.89 करोड़ है, जो कि भारत की जनसंख्या का 5.66 प्रतिशत है। जनसंख्या के अनुसार ये देश में सातवें स्थान पर है। राजस्थान में 33 ज़िले और 07 संभाग हैं। इसके अलावा हाल में 19 नए ज़िले और तीन नए संभाग बनाने की घोषणा की गयी है।
राजस्थान पड़ोसी मुल्क़ पाकिस्तान से सटा हुआ है, उसके साथ इसकी 1,070 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर ज़िलों की सीमाएं पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगती हैं जबकि, राजस्थान की 4850 किलोमीटर सीमा देश के दूसरे राज्यों से मिलती है जिनमें पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात राजस्थान के सीमावर्ती राज्य हैं।
14 जनवरी, 1949 को उदयपुर की एक सार्वजनिक सभा में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर रियासतों के सैद्धांतिक रूप से विलय की घोषणा की थी। इस घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर में 30 मार्च 1949 को एक समारोह में वृहद् राजस्थान का उद्घाटन किया. इसलिए राजस्थान दिवस हर वर्ष तीस मार्च को मनाया जाता है।
आज़ादी के समय राजस्थान में कुल 22 रियासतें थी, वर्तमान राजस्थान में तत्कालीन 19 देसी रियासतों में राजाओं का शासन हुआ करता था जबकि, 03 रियासतों (नीमराना, लव और कुशालगढ़ ) में चीफ़शिप थी। यहां के अजमेर मेरवाड़ा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का राज था, इसलिए यह स्वतः ही स्वतंत्र भारत में शामिल हो जाती। तत्कालीन रियासतों के विलय की प्रक्रिया 18 मार्च 1948 से एक नवंबर 1956 तक चली, इस प्रक्रिया को 07 चरणों में पूरा किया गया था।
भारत सरकार ने अफ़ज़ल अली के नेतृत्व में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर ब्रिटिश शासित अजमेर मेरवाड़ा प्रांत का 1 नवंबर 1956 को राजस्थान में विलय कर लिया। इस दौरान ही मध्यप्रदेश की मंदसौर तहसील के गांव सुनेलटप्पा को भी राजस्थान में शामिल किया गया जबकि, राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के गांव सिरोंज को मध्यप्रदेश में शामिल किया गया। भारत सरकार की गठित राव समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर 7 सितंबर 1949 को जयपुर को राजस्थान राज्य की राजधानी बनाया गया।
तत्कालीन मेवाड़, मारवाड़, जयपुर, बूंदी, कोटा भरतपुर और अलवर पहले बड़ी रियासतें हुआ करती थीं। यहां चौहान, राठौड़, गहलोत और परमार वंशों का राज था। यहां कई बड़ी जंग हुईं और मुग़लों और बाहरी आक्रमणों ने यहां के इतिहास को शौर्य गाथाओं से भर दिया।
राजस्थान, पृथ्वी राज चौहाण, महाराणा प्रताप, राणा सांगा, राणा कुंभा जैसे शूरवीरों के इतिहास को सहेजे हुए है। देश-दुनिया में राजस्थान को वीरों की धरती से पहचाना जाता है। हल्दी घाटी का युद्ध, चित्तौड़, खानवा, तराइन, रणथंभौर के युद्ध राजस्थान की धरती पर ही हुए।
आजादी से पहले राजस्थान को ‘राजपूताना’ के नाम से जाना जाता था। जार्ज थॉमस ने साल 1800 ईसा में ‘राजपूताना’ नाम दिया था। माना जाता है कि कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य का नाम राजस्थान रखा। स्थानीय साहित्यिक भाषा में राजाओं के निवास प्रांत को राजस्थान ही कहा जाता था। राजस्थान का ही संस्कृत रूप राजस्थान बना, जिसका अर्थ है राजाओं का स्थान। रियासतों के विलय के बाद जब एकीकृत राज्यों के नाम दिए गए तब राजस्थान नाम को ही स्वीकृति दी गई।
राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का शुरुआती नाम राजपूताना विश्वविद्यालय था, वर्तमान में यह राजस्थान विश्वविद्यालय है।
राजस्थान ख़ूबसूरत गहनों और रत्नों के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई तरह की पेंटिंग शैलियां हैं। मेवाड़, कोटा, बूंदी, मारवाड़, बीकानेर और जयपुर शैलियां लघु चित्रकला शैलियां हैं। साथ ही राजस्थान की बनी मिठाइयां भी विश्वविख्यात हैं। राज्य का घेवर बहुत प्रसिद्ध है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और राजस्थान का सबसे ज़िला जैसलमेर है। जैसलमेर का क्षेत्रफल 38,401 किलोमीटर है।पाकिस्तान सीमा से जैसलमेर की सर्वाधिक सीमा लगती है, इस कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी यह अहम ज़िला है। ख़ास बात है कि क्षेत्रफल में बड़ा लेकिन आबादी के मुताब़िक जैसलमेर प्रदेश का सबसे छोटा ज़िला है, ज़िले में 6,69,619 आबादी निवास करती है।
जैसलमेर का संभागीय मुख्यालय जोधपुर है। जैसलमेर में तनोट माता का मंदिर और रेत के टीलों को देखने के लिए देश और विदेश से सैलानी आते हैं। पाकिस्तान से विस्थापित कई हिंदू परिवार जैसलमेर के अलग-अलग इलाक़ों में रहते हैं।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सीमा से सटा राजस्थान का धौलपुर 3,034 किलोमीटर क्षेत्र में बसा सबसे छोटा ज़िला है। चंबल नदी के किनारे बसे धौलपुर की आबादी क़रीब 12 लाख है जो उत्तर प्रदेश के आगरा और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जुड़ता है। धौलपुर में पत्थर की खानों से निकला लाल पत्थर विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसलिए इस ज़िले को रेड स्टोन सिटी के नाम से भी जाना जाता है. देश की कई ईमारतों में धौलपुर का ही पत्थर लगा हुआ है।
राज्य में सबसे कम लिंगानुपात वाला ज़िला भी धौलपुर है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक़ यहां लिंगानुपात 846 है। धौलपुर में देश की सबसे बड़ी बारूद फ़ैक्ट्री है और यहां से बीहड़ों के कुख्यात कई डकैतों की कहानियां भी जुड़ी हैं।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जैसलमेर ज़िले में कुलधरा गांव सबसे पुराना गांव है। माना जाता है कि यह गांव 200 साल से वीरान है। इस गांव के लोग रातों रात गांव छोड़ कर चले गए, फिर कभी नहीं लौटे, और न ही कुलधरा गांव फिर कभी बसा। लोग गांव छोड़ कर क्यों गए इसके पीछे तत्कालीन जैसलमेर रियासत के दीवान सालिम सिंह से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है।इस गांव को देखने के लिए हज़ारों पर्यटक पहुंचते हैं वर्तमान में कुलधरा गांव पुरातत्व विभाग की देखरेख में है।
राजस्थान का प्रसिद्ध और राज्य पक्षी गोडावण है। इसे अंग्रेज़ी भाषा में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ कहा जाता है। साल 1981 में गोडावण को राज्य पक्षी घोषित किया गया था। यह पक्षी शुतुर्मुर्ग की तरह दिखता है। लंबी गर्दन और लंबी टांगों वाले इस पक्षी की लंबाई लगभग एक मीटर होती है। इसके शरीर का रंग भूरा होता है, पंखों पर काले, भूरे और सिलेटी रंग के निशान होते हैं। जैसलमेर, बांरा और अजमेर में ये सर्वाधिक देखा जाता है। उड़ने वाले पक्षियों में गोडावण सबसे भारी होता है। गोडावण की संख्या बेहद कम बची है, यह विलुप्त होने के कग़ार पर है।
गर्मियों के दिनों में राजस्थान के जोधपुर का फ़लौदी अपने अधिकतम तापमान को लेकर देश भर में ख़ूब सुर्खियों में रहता है। 19 मई, 2016 को मौसम विभाग ने यहां अधिकतम तापमान 51 डिग्री रिकॉर्ड किया था। यहां गर्मी ही नहीं बल्क़ि ठंडे शहर की बात करें तो माउंट आबू सबसे ठंड़ा रहता है, जो अरावली पर्वतमाला में बसा एक ख़ूबसूरत शहर है। सिरोही ज़िले में माउंट आबू को गर्मियों की राजधानी भी कहा जाता है। गर्मियों में जब राज्य के कई इलाक़ों में तापमान 45 डिग्री पहुंच जाता है, जब माउंट आबू में औसत तापमान 34 डिग्री के क़रीब रहता है।माउंट आबू की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर समुद्र तल से 1722 मीटर ऊंचाई पर है। देश विदेश से पर्यटक माउंट आबू की ख़ूबसूरती देखने पहुंचते हैं। सिरोही गुजरात से भी सटा हुआ है, इसलिए गुजरात से भी बड़ी संख्या में माउंट आबू आते हैं।
खेजड़ी, यह राजस्थान का राजकीय वृक्ष है। खेजड़ी को राजस्थान का कल्प वृक्ष भी कहते हैं। इसका साइंटिफिक नाम ‘प्रोसेसिप-सिनेरेरिया’ है। खेजड़ी वृक्ष की आयु पांच हज़ार साल मानी जाती है। राज्य के शेखावाटी और नागौर में अधिक संख्या में खेजड़ी के वृक्ष मिलते हैं। 12 सितंबर 1978 से 12 सितंबर को खेजड़ी दिवस मनाने की शुरुआत हुई। अमृतादेवी विश्नोई ने 363 लोगों के साथ जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया। खेजड़ी में हरी फली आती हैं, इन्हें सांगरी कहते हैं। सांगरी की सब्जी बनाई जाती है। सूखी फली और पत्तियां पशुओं के चारे में काम आता है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर सबसे बड़ा शहर है. जयपुर छोटी काशी और गुलाबी नगरी (पिंक सिटी) के नाम से भी पहचान रखता है। यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की आबादी 35 लाख से ज़्यादा है और यह शहर 484 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। जनसंख्या के आधार पर जोधपुर और क्षेत्रफल के आधार पर कोटा दूसरे नंबर पर आते हैं। जयपुर की स्थापना 1727 में महाराजा जयसिंह ने की थी। जयपुर में धातु, संगमरमर, कपड़े की छपाई, हस्तकला, रत्न व आभूषण का आयात-निर्यात होता है।
सांभर झील का नाम तो आपने सुना ही होगा। राजस्थान में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है। देश को मिलने वाले नमक़ में सांभर का बड़ा योगदान है। यह जयपुर शहर से क़रीब 80 किलोमीटर दूर है। इसका क्षेत्रफल लगभग 190 से 230 वर्ग किलोमीटर है। राज्य में कुल छह ज़िलों में खारे पानी की झीलें हैं। जयपुर में सांभर, बाड़मेर में पचपदरा झील, जोधपुर में फ़लौदी झील, नागौर में डीडवाना झील, बीकानेर में लूणकरणसर झील और जैसलमेर में कावोद झील।
राज्य के उदयपुर ज़िले को झीलों की नगरी कहा जाता है। राज्य में सबसे ज़्यादा झीलें उदयपुर में ही हैं। उदयपुर की फतेहसागर झील, जयसमंद और पिछौला झील हैं। उदयपुर की झीलें मानव निर्मित झीले हैं। सिरोही ज़िले के माउंट आबू में नक्की झील और अजमेर की पुष्कर झील भी मीठे पानी की झील हैं।
राजस्थान सात संभाग में बंटा हुआ है, जिसमें फिलहाल 33 ज़िले हैं। राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं। राज्य 25 लोकसभा सांसद चुनकर देश की संसद में भेजता है और दस राज्यसभा सांसद सीटें हैं। राज्य में दस नगर निगम, 34 नगर परिषद, 173 नगर पालिकाएं हैं। राज्य में 33 ज़िला परिषद, 352 पंचायत समितियां और 11,304 ग्राम पंचायतें हैं। राज्य में 305 उपखंड, 369 तहसील, 186 उप-तहसील, 10,833 पटवार मंडल, 47, 229 गांव, तीन विकास प्राधिकरण (जयपुर, जोधपुर और अजमेर) हैं।
कहा जाता है हर बारह कोस पर बोली बदल जाती है।राजस्थान विभिन्न बोलियों, संस्कृति, खान-पान और रीति-रिवाज़ के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। राज्य के सर्वाधिक ज़िलों में मारवाड़ी बोली जाती है. मारवाड़ी को राजस्थानी भाषा के रूप मान्यता दिलाने लिए कई बार आवाज़ें भी उठी हैं। राज्य में बोली जाने वाली बोलियों के अनुसार ही उन क्षेत्रों को भी बोली के नाम से ही जाना जाता है। जैसे कोटा, बूंदी, बांरा और झालावाड़ में हाड़ौती बोली जाती है। इन ज़िलों को एक साथ जोड़ते हुए हाड़ौती क्षेत्र कहा जाता है। मारवाड़ी जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, सीकर समेत कई ज़िलों में बोली जाती है जबकि, उदयपुर और आसपास के इलाक़े को मेवाड़ कहा जाता है, यहां मेवाड़ी बोली जाती है. जयपुर, सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक में ढूंढाणी बोली जाती है। अलवर और भरतपुर ज़िले के उत्तर-पश्चिम हिस्से में बोली जानी वाली भाषा को मेवाती कहा जाता है. इसी तरह गुजरात सीमा से सटे डूंगरपुर और बांसवाड़ा ज़िलों को वागड़ कहा जाता है, यहां वागड़ी बोली जाती है।
जनगणना 2011 के अनुसार राज्य की साक्षरता दर 66.11 है और सर्वाधिक साक्षरता 76.56 कोटा ज़िले में है। कोटा को शिक्षा नगरी भी कहा जाता है। यहां पढ़ने के लिए देशभर से दो से तीन लाख स्टूडेंट्स आते हैं। कोटा के बाद दूसरे नंबर पर राजधानी जयपर है, इसकी साक्षरता दर 75.51 है। महिला साक्षरता दर पुरुषों के मुक़ाबले राज्य में बेहद कम है। यहां पुरुषों की साक्षरता दर 79.19 है जबकि महिलाओं की 52.12 है। सबसे कम महिला साक्षरता दर 38.47 जालौर ज़िले में है जबकि, सर्वाधिक शिक्षा नगरी कोटा में 65.87 है।
म्हारो रंगीलो राजस्थान- यानी यहां विभिन्न तरह के रीति-रिवाज़, संस्कृति, खान-पान, बोलियां और पहनावा है। इसी के साथ राज्य के कई बड़े शहरों के नाम भी रंगों के नाम से ही पहचाने जाते हैं।
पिंक सिटीः जयपुर को गुलाबी नगरी कहा जाता है. जब इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस ऑफ़ वेल्स युवराज अल्बर्ट जयपुर आने वाले थे उस वक्त जयपुर के तत्कानील महाराजा सवाई रामसिंह के आदेश पर शहर को गुलाबी रंग से रंगा गया था। तभी से जयपुर को गुलाबी नगरी कहा जाता है। आज भी जयपुर शहर (परकोटा) में गुलाबी रंग से रंगे हुए बाज़ार, घर और ईमारतें देखने को मिलेंगी।
ब्लू सिटीः जोधपुर शहर को ब्लू सिटी यानी नीला शहर के नाम से जाना जाता है। शहर के घरों को नीले रंग से रंगा गया है। ऊंचाई से देखने पर यह नीला शहर दिखाई पड़ाता है। इसलिए शहर को ब्लू सिटी यानी कि नीला शहर कहा जाता है। जोधपुर को कम से कम साढ़े पांच सदी पहले बसाया गया था। यहां के पंद्रहवें राजा राव जोधा के नाम पर इस शहर का नाम जोधपुर रखा गया। जोधपुर के चारों ओर रेगिस्तान है और जोधपुर के फ़लौदी में गर्मियों का तापमान देश भर को चौंका देता है। माना जाता है कि गर्मी से बचने के लिए यहां सभी घरों को नीले रंग से रंगा जाता है।
गोल्डन सिटीः क्षेत्रफल में राजस्थान के सबसे बड़े और सरहदी ज़िले जैसलमेर को गोल्डन सिटी कहा जाता है। जैसलमेर में लगभग सभी इमारतें और घर पीले रंग के पत्थर से बने हुए हैं। ऊंचाई से देखने पर यह शहर सोने के रंग सा नज़र आता है। जैसलमेर से निकलने वाला पत्थर पीले रंग का होता है जो सूर्य की किरणें पड़ते ही यह पीले पत्थर की इमारतें सोने की तरह चमकती हैं। साथ ही रेगिस्तान की रेत भी ढलते सूर्य के समय स्वर्णिम आभा देती है। इसलिए इस शहर को गोल्डन सिटी यानी कि स्वर्ण नगरी कहा जाता है।
विभिन्न देशी विदेशी श्रोतों का यथास्थान उपयोग किया है।
NikhileshMishra
