यहां गली गली हमराज कांप्लेक्स जैसे ‘मौत के सौदागर’
कानपुर के मुस्लिम इलाकों में नियम कायदे ताक पर रखकर खड़ी की गई बहुमंजिली इमारतें
केडीए, नगर निगम, केस्को, जलकल और फायर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बने रहे तमाशबीन
स्वराज इंडिया की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे पढ़ते रहिए
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
हमराज़ कॉम्प्लेक्स में लगी भयावह आग आपको याद होगी।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिसमें लगभग 500 से 600 दुकानें जल कर राख हो गई थीं।100 से 150 करोड़ के नुकसान का आकलन किया गया था।कम से कम वहां फायर ब्रिगेड की गाड़िया चारों तरफ काम तो कर पा रही थीं। उसके बाद भी आग पे काबू पाने में 3 दिन और 10 घंटे का समय लगा था। आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया था। मगर उसके बाद भी प्रशासन और लोग सचेत नहीं हो रहे हैं ।
घनी आबादी जैसे चमन गंज,प्रेम नगर,बेकन गंज, इफ्तिखारा बाद,दलेल पुरवा, बांसमंडी, रज़वी रोड,हीरामन पुरवा,नई सड़क। इन सभी घनी आबादी वाले इलाकों में न ही केवल सड़क पे बल्कि सड़क के पीछे बसीं पतली पतली गलियों में जो मोहल्ले हैं।वहां बहु मंजिला इमारत बनाई गईं हैं। जिनमें कुछ 5 तल की है कुछ 6 तल की। अनोखी बात तो ये है 99 प्रतिशत किसी का नक्शा भी पास नहीं होता है। किसी भी मानक और नियमावली का पालन किए बिना ही ऐसे निर्माण लगातार होते ही जा रहे हैं।कुछ ऐसी मार्केट्स भी हैं जहां से व्यापार होता है।इन इमारतों में केस्को को नियमावली के अनुसार 100 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाना चाहिए तो केस्को 20 हज़ार से लेकर 25 हज़ार रुपए प्रति मीटर लेकर ऐसी अवैध बिल्डिंगो में कनेक्शन दे रही है।ऐसी बिल्डिंगों में 10 से ले कर 18 फ्लैट तक होते हैं। इस प्रकार के सैंकड़ों भवन हैं कराड़ों रुपए का भ्रष्टचार केस्को कर रही है।सरकारी खज़ाने पे चपत लगा रही है।दूसरी तरफ यदि शॉर्ट सर्किट होकर इन अवैध निर्माणों में आग लगी तो फायर ब्रिगेड का फ भी आग बुझाने जा ही नहीं पायेगा इतने सकरे रास्ते हैं।साथ साथ ऐसे अवैध निर्माणों में आग की रोकथाम की कोई व्यवस्था नहीं होती है।एक ही निकासी होती है।इस तरह के अवैध निर्माणों पर प्रशासन आंख मूंद के बैठा है। केस्को ने तो नियमावली को तक पे रख कर जहां ट्रांसफार्मर लगाने चाहिए थे।वहां मीटर लगा कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया है।जिसका आंकड़ा कई सौ करोड़ पार कर जाएगा।क्योंकि ऐसे अवैध निर्माण सैकडों की संख्या में हैं। हालाकि केस्को को ऐसे अवैध निर्माणों में बिजली का कनेक्शन ही नहीं देना चाहिए था।जहां शॉर्ट सर्किट से यदि आग लग गई तो जान और माल की हानि संभाले नहीं संभलेगी।ऐसे अवैध निर्माण साक्षात प्रकट मुद्रा में आप ऊपर दिए गए छेत्रो में घूम घूम के देख सकते हैं। इस तरह के निर्माण बन कैसे जाते हैं ये समझिए।
कई माफिया बिल्डर लगा रहे हैं सरकार को चूना
फतेहपुर वाले अज्जन बिल्डर सहित अन्य को सभी इरफान सोलंकी वाले अग्नि कांड और परेड पे हुए देंगे के बाद जान ही गए होंगे। मगर इनके अलावा भी कई ऐसे प्लेयर्स हैं जो कि इस तरह के अवैध निर्माण बनाने पैसों को धड़ले से रिश्वत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के निर्माण में छोटे बड़े कई व्यापारी मोटी कमाई के चक्कर में पैसा इन्वेस्ट करते हैं। मतलब कई लोगों का पैसा लगा होता है।2 से 3 या उससे भी अधिक बड़े व्यापारी अपने पैसे और बाजार के पैसे से इन अवैध निर्माणों को बनाने का काम करते हैं।काफी बड़ा सिंडीकेट होता है इन लोगो का।और इस सिंडीकेट में हर व्यक्ति का अलग अलग रोल होता है।जैसे कब और कैसे किसी अधिकारी से संपर्क साधना है।कैसे उसके गिफ्ट देना है या किसी काम के लिए रिश्वत के पैसे देने हैं।संपत्ति खरीद कर या बिल्डर एग्रीमेंट पे ऐसे निर्माण कराए जाते हैं।अगर चमन गंज की बात करें तो नायब पतंग वाले ऐसे निर्माणों के बड़े प्लेयर हैं।इनकी जांच अगर बैठा दी जाए तो अकेले ये ही सबकी और हर प्रकार की जानकारी उपलब्ध करा देंगे।मगर हमारा उद्देश्य एक ऐसे भ्रष्टचार की ओर आप लोगों का ध्यान ले जाना है जिसमें जनता का जीवन दांव पे लगा हुआ है।


